ॐ त्र्यैलोक्यमोहन वेधसे नमः। शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् |
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ||
परिवर्तिनी एकादशी विशेष पूजा 2026: श्रीहरि विष्णु पूजन एवं वामन कथा
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परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा एवं विशेष पूजा 2026: श्रीहरि विष्णु पूजन, वामन कथा एवं महाविष्णु मंत्र जाप (22 सितंबर 2026, मंगलवार, प्रयागराज)
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे पार्श्व एकादशी, वामन एकादशी और जयन्ती एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 22 सितंबर (मंगलवार) को रखा जाएगा। मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में विराजमान भगवान श्रीहरि विष्णु इसी दिन अपनी करवट (पार्श्व) बदलते हैं, इसीलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा से भी जुड़ी है, जिसमें राजा बलि से तीन पग भूमि दान में लेकर भगवान ने उन्हें विशेष आशीर्वाद प्रदान किया था। इस अत्यंत शुभ अवसर पर श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, प्रयागराज में “श्रीहरि विष्णु पूजन, तुलसी अर्चना एवं परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा” का विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है।
यदि आप भी अपने परिवार की सुख-शांति, मंगल, समृद्धि, स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए भगवान श्रीहरि विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो श्री दिव्य मंदिर के माध्यम से अपने नाम और गोत्र से इस विशेष पूजा एवं संकल्प में ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से भाग ले सकते हैं।
पूजा का मुख्य उद्देश्य एवं महत्व
परिवर्तिनी एकादशी की पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान श्रीहरि के चरणों में श्रद्धा, प्रार्थना और संकल्प अर्पित करने का पावन अवसर है। श्री दिव्य मंदिर में यह अनुष्ठान निम्नलिखित शुभ संकल्पों के साथ संपन्न किया जाएगा:
- पारिवारिक सुख-शांति: परिवार में आपसी प्रेम, तालमेल और मानसिक शांति हेतु।
- स्वास्थ्य एवं आरोग्य: गंभीर बीमारियों से रक्षा और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति।
- समृद्धि एवं उन्नति: व्यापार, करियर और धन-धान्य में वृद्धि की प्रार्थना।
- सकारात्मक ऊर्जा: जीवन से नकारात्मकता, भय और तनाव को दूर करना।
- मनोकामना पूर्ति: भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी के चरणों में विशेष इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना।
(ध्यान दें: यह अनुष्ठान पूर्णतः शास्त्रोक्त विधि से आस्था और प्रार्थना के रूप में किया जाता है।)
पूजा में शामिल मुख्य अनुष्ठान एवं वैदिक विधि
श्री दिव्य मंदिर के विद्वान आचार्यों और पंडितों द्वारा यह पूजा पूरी तरह से वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न की जाएगी। पूजा की 12-स्तरीय चरणबद्ध (Step-by-Step) विधि इस प्रकार है:
- शुद्धिकरण एवं तैयारी: पूजा स्थल और मंदिर का पवित्र गंगाजल से मार्जन।
- श्री गणेश पूजन: किसी भी विघ्न के बिना पूजा पूर्ण होने के लिए प्रथम पूज्य गणेश जी का आवाहन।
- कलश स्थापना एवं पूजन: सर्व-देवताओं के वास हेतु पवित्र कलश की स्थापना।
- नाम एवं गोत्र संकल्प: यजमान के नाम, गोत्र, शहर और परिवार के विवरण के साथ विशेष संकल्प।
- श्रीहरि विष्णु पूजन: भगवान श्रीहरि विष्णु का विधिवत धूप, दीप, गंध, पुष्प एवं नैवेद्य से पूजन।
- तुलसी अर्चना: भगवान विष्णु को अतिप्रिय तुलसी माता का विधिवत पूजन एवं अर्चना।
- पंचामृत अभिषेक: शुद्ध जल, गंगाजल, गाय के दूध, दही, देसी घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से भगवान विष्णु का अभिषेक।
- पुष्प एवं तुलसी दल अर्पण: ताजे पुष्प, तुलसी दल एवं मौसमी फलों का नैवेद्य अर्पित करना।
- विष्णु मंत्र जाप: मंगल, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के लिए विष्णु मंत्रों का सस्वर जाप।
- विष्णु सहस्रनाम एवं व्रत कथा पाठ: विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र एवं परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ।
- वैदिक हवन: मंत्रोच्चार के साथ पवित्र अग्नि में आहुतियां।
- पूर्णाहुति एवं विष्णु आरती: कपूर और दीप से आरती, जिसके बाद सुख-समृद्धि की अंतिम प्रार्थना।
- प्रसाद वितरण: पूजा में अर्पित भोग और प्रसाद का वितरण।
ऑनलाइन पूजा बुकिंग प्रक्रिया (Step-by-Step Flow)
यदि आप प्रयागराज स्थित मंदिर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकते, तो आप घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से इस पूजा का हिस्सा बन सकते हैं:
- पूजा का चयन करें: वेबसाइट पर “परिवर्तिनी एकादशी विशेष पूजा” चुनें।
- विवरण भरें: अपना नाम, गोत्र, मोबाइल नंबर, शहर, परिवार के सदस्यों के नाम और अपनी विशेष मनोकामना दर्ज करें।
- ऑनलाइन बुकिंग करें: सुरक्षित पेमेंट गेटवे के माध्यम से बुकिंग पूर्ण करें।
- कन्फर्मेशन प्राप्त करें: बुकिंग सफल होते ही आपके WhatsApp और ईमेल पर विवरण प्राप्त होगा।
- डिजिटल सहभागिता:
- संकल्प: पूजा वाले दिन पंडित जी आपके नाम और गोत्र से संकल्प लेंगे।
- लाइव दर्शन / वीडियो: पूजा का लाइव दर्शन लिंक या आपके नाम के संकल्प के साथ पूजा का विशेष वीडियो भेजा जाएगा।
- प्रसाद वितरण: आपके द्वारा चुने गए पैकेज के अनुसार प्रसाद आपके पंजीकृत पते पर कूरियर द्वारा भेजा जाएगा।
परिवर्तिनी एकादशी पूजा पैकेज विवरण
| सुविधा / अनुष्ठान | पैकेज में शामिल विवरण |
| मुख्य अनुष्ठान | गणेश पूजन, कलश पूजन, श्रीहरि विष्णु पूजन, तुलसी अर्चना, पंचामृत अभिषेक, हवन |
| विशेष जाप | विष्णु मंत्र जाप, विष्णु सहस्रनाम पाठ एवं व्रत कथा |
| यजमान संकल्प | आपके नाम, गोत्र एवं परिवार के नाम से व्यक्तिगत संकल्प |
| अपडेट्स & मीडिया | WhatsApp पर पुष्टि, पूजा का personalized वीडियो, लाइव दर्शन (उपलब्धता अनुसार) |
अतिरिक्त सेवाएँ: विशेष चढ़ावा (Extra Chadhava Options)
अपनी पूजा को और अधिक फलदायी बनाने के लिए आप अपनी बुकिंग के साथ नीचे दिए गए अतिरिक्त चढ़ावा विकल्प भी जोड़ सकते हैं:
- विशेष 108 तुलसी दल अर्पण
- ताजे पुष्प एवं माला अर्पण
- विशेष पंचामृत अभिषेक सेवा
- मंदिर में 11 या 21 दीपदान
- फल एवं विशेष मिष्ठान भोग
परिवर्तिनी एकादशी 2026 की पूजा अभी बुक करें
परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान श्रीहरि विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर न चूकें। अपने और अपने परिवार के मंगल, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए आज ही श्री दिव्य मंदिर, प्रयागराज की आधिकारिक वेबसाइट से अपना संकल्प बुक करें।
- पूजा तिथि: 22 सितंबर 2026 (मंगलवार)
- स्थान: श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, प्रयागराज
Puja Benefits
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Puja Process
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: परिवर्तिनी एकादशी की यह विशेष पूजा त्रिवेणी संगम की पावन धरा पर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, प्रयागराज में विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न की जाएगी।
उत्तर: हाँ, आप ऑनलाइन संकल्प बुकिंग के माध्यम से इस परिवर्तिनी एकादशी विशेष पूजा में सम्मिलित हो सकते हैं, चाहे आप देश में कहीं भी हों। पंडित जी आपके नाम और गोत्र से संकल्प लेकर पूजा सम्पन्न करेंगे।
उत्तर: वर्ष 2026 में परिवर्तिनी एकादशी व्रत 22 सितंबर (मंगलवार) को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात्रि लगभग 8 बजे आरंभ होकर 22 सितंबर की रात्रि लगभग 9:43 बजे तक रहेगी। व्रत का पारण (व्रत खोलने का समय) 23 सितंबर 2026 को प्रातः लगभग 6:09 से 8:35 बजे के मध्य किया जाएगा।
उत्तर: मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान योगनिद्रा में विराजमान भगवान विष्णु परिवर्तिनी एकादशी के दिन अपनी करवट बदलते हैं, इसीलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि की कथा से भी जुड़ा है। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्त को पुण्य, सुख-समृद्धि एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
उत्तर: बुकिंग के समय आपको यजमान (मुख्य व्यक्ति) का पूरा नाम
गोत्र (यदि ज्ञात हो)
शहर एवं पूरा पता
संकल्प / मनोकामना
मोबाइल नंबर एवं व्हाट्सएप नंबर देना होगा।
उत्तर: पूजा सम्पन्न होने के बाद आपको WhatsApp पर पूजा का personalized वीडियो एवं संकल्प का प्रमाण भेजा जाएगा, तथा चुने गए पैकेज के अनुसार दिव्य आशीर्वाद बॉक्स (प्रसाद) आपके पते पर 8-10 दिनों में कूरियर द्वारा भेजा जाएगा।



