ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
Putrada Ekadashi Vishesh Puja 2026 | पुत्रदा एकादशी विशेष पूजा
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Putrada Ekadashi 2026: सावन पुत्रda एकादशी का महत्व, व्रत कथा, पूजा विधि और विशेष अनुष्ठान
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में से सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘पुत्रदा एकादशी’ (Putrada Ekadashi) के नाम से जाना जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है—यह एकादशी संतान सुख, संतान की दीर्घायु और उनके उज्ज्वल भविष्य की मनोकामना को पूरा करने वाली मानी जाती है।
वर्ष 2026 में सावन पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त (रविवार) को पड़ रही है। इस पावन दिन पर भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना करने से न केवल संतान संबंधी सभी बाधाएँ दूर होती हैं, बल्कि परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
आइए, विस्तार से जानते हैं सावन पुत्रदा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के बारे में।
🗓️ पुत्रदा एकादशी 2026: शुभ तिथि एवं मुहूर्त (Date & Muhurat)
- एकादशी तिथि: 23 अगस्त 2026 (रविवार)
- माह व पक्ष: सावन माह, शुक्ल पक्ष
- मुख्य देवता: भगवान श्रीहरि विष्णु
- विशेष अनुष्ठान: श्री दिव्य मंदिर द्वारा आयोजित ‘विशेष पूजा एवं संकल्प’
🌟 सावन पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व (Significance)
पद्म पुराण के अनुसार, सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से वाजपेय यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है।
- संतान सुख की प्राप्ति: जिन दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा हो, उनके लिए यह व्रत और पूजा अत्यंत फलदायी मानी गई है।
- संतान के कष्टों का निवारण: जो लोग पहले से माता-पिता हैं, वे अपनी संतान की आरोग्य, सफलता और लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखते हैं।
- पापों से मुक्ति: इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करने से व्यक्ति के पूर्व जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
📜 सावन पुत्रदा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा (Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में महिष्मती नाम की नगरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। उनकी रानी का नाम शैव्या था। राजा के पास सब कुछ था—धन, वैभव, उत्तम राज्य—लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। इस कारण राजा और रानी हमेशा दुखी और चिंतित रहते थे।
एक दिन राजा दुखी होकर वन की ओर चले गए। वन में भ्रमण करते हुए वे ऋषियों के आश्रम पहुँचे। वहाँ मुनियों ने राजा से उनके दुख का कारण पूछा। राजा ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि बिना संतान के उनका जीवन व्यर्थ लग रहा है।
तब ऋषियों ने राजा को बताया कि सावन माह के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत अत्यंत प्रभावकारी है। ऋषियों की अज्ञा से राजा ने विधि-विधान से पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा, पूजा-अर्चना की और पारण किया।
इस व्रत के पुण्य प्रभाव से कुछ समय बाद रानी शैव्या ने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया, जिसने आगे चलकर एक न्यायप्रिय और प्रतापी राजा के रूप में ख्याति प्राप्त की। तभी से इस एकादशी को ‘पुत्रदा एकादशी’ कहा जाने लगा।
🛕 पुत्रदा एकादशी की पूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
यदि आप घर पर या मंदिर में पुत्रदा एकादशी की पूजा कर रहे हैं, तो इन वैदिक नियमों का पालन करें:
- प्रातः स्नान व संकल्प: एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल और तिल लेकर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत व पूजा का संकल्प लें।
- श्रीहरि विष्णु पूजन: पूजा स्थल पर भगवान विष्णु या बाल गोपाल की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं।
- तुलसी एवं पुष्प अर्पण: भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अत्यंत प्रिय हैं। ध्यान रहे, बिना तुलसी के श्रीहरि भोग स्वीकार नहीं करते।
- मंत्र जाप व सहस्रनाम पाठ: पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का निरंतर जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- हवन एवं कथा श्रवण: धूप-दीप जलाकर पुत्रदा एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें। सात्विक फल व नैवेद्य का भोग लगाकर वैदिक हवन करें।
- आरती व क्षमा प्रार्थना: अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती गाएं और जाने-अनजाने हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।
🔱 श्री दिव्य मंदिर द्वारा आयोजित ‘पुत्रदा एकादशी विशेष पूजा 2026’
यदि व्यस्तता या किसी अन्य कारण से आप स्वयं संपूर्ण विधि-विधान से पूजा करने में असमर्थ हैं, तो श्री दिव्य मंदिर आपके लिए लेकर आया है घर बैठे ऑनलाइन पूजा में शामिल होने का अवसर।
23 अगस्त 2026 को श्री दिव्य मंदिर के विद्वान आचार्यों द्वारा सावन पुत्रदा एकादशी पर विशेष महाअनुष्ठान संपन्न कराया जाएगा।
🔹 इस विशेष पूजा में क्या-क्या शामिल रहेगा?
- श्रीहरि विष्णु पूजन एवं तुलसी अर्चना
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ महामंत्र का जाप
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ व पुत्रदा एकादशी व्रत कथा
- संतान सुख, स्वास्थ्य एवं उज्ज्वल भविष्य हेतु विशेष नाम-गोत्र संकल्प
- दोष निवारण हेतु वैदिक हवन एवं फल-नैवेद्य अर्पण
Puja Benefits
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Puja Process
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: नहीं, यह पूजा किसी मंदिर में नहीं होती। यह पूरी तरह से प्रयागराज त्रिवेणी संगम के पवित्र तट और जल के पास करायी जाती है।
हां, आप ऑनलाइन संकल्प बुकिंग के माध्यम से इस पूजा में सम्मिलित हो सकते हैं, चाहे आप कहीं भी हों।
उत्तर: प्रयागराज संगम पर साल के 365 दिन पूजा की जा सकती है। सूर्य ग्रहण, अमावस्या, पूर्णिमा और माघ मेला के दौरान इसका महत्व और बढ़ जाता है।
पूरा नाम
गोत्र (यदि ज्ञात हो)
जन्म तिथि (वैकल्पिक)
संकल्प / मनोकामना
मोबाइल नंबर
पूजा सम्पन्न होने के बाद उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार प्रसाद, पूजा का फोटो/वीडियो या प्रमाण उपलब्ध कराया जा सकता है।



